नव वर्ष इतना करना
-हनवन्त मल लोढ़ा
हर पेट को तू भरना ,
हर तन को तू ढकना ,
हर घर को तू नमना ,
नव वर्ष इतना करना।
हर दीन का दुख हरना ,
हर दर्द की दवा करना ,
हर मांग को तू भरना ,
नव वर्ष इतना करना।
देश में हो खुशाहाली ,
हर घर मने दीवाली ,
बहे दूध घी का झरना ,
नव वर्ष इतना करना।
आतंक न बढ़ने पाये ,
कोई देवी जल न जाये ,
हो दहेज का ना धरना ,
नव वर्ष इतना करना।
बहे प्रेम की यों गंगा ,
न हो सम्प्रदायी दंगा ,
न पड़े किसी को डरना ,
नव वर्ष इतना करना।
महंगाई बढ़ न पाये ,
महामारी भी न आये ,
तू अमन चैन करना ,
नव वर्ष इतना करना।
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