डायरी और शायरी
-हनवंत मल लोढ़ा
उन्होंने पूछा-
क्या बात है?
आजकल लिखते हो खूब
लेख, कविता, शायरी,
हमने कहा-वकील जो हैं
आजाद हिन्दुस्तान में, साल में चार महीने
चलती है कचहरियाँ,
आठ महीने रहती है छुट्टियाँ
इसलिए तो कोट की दोनों जेबों में,
रखते हैं दो डायरी
एक में नोट करते हैं पेशियां
तो दूसरे में लिखते हैं शायरी I
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