Monday, November 6, 2017

डायरी और शायरी

डायरी  और शायरी 

-हनवंत मल लोढ़ा 






उन्होंने पूछा-
                 क्या बात है?
                                आजकल लिखते हो खूब 
                                                 लेख, कविता, शायरी, 
हमने कहा-वकील जो हैं 
                आजाद हिन्दुस्तान में, साल में चार महीने 
                                  चलती है कचहरियाँ,
                                                 आठ महीने रहती है छुट्टियाँ 
इसलिए तो कोट की दोनों जेबों में,
               रखते हैं दो डायरी 
                              एक में नोट करते हैं पेशियां 
                                               तो दूसरे में लिखते  हैं शायरी I


एक व्यक्ति एक पद

एक व्यक्ति एक पद 

-हनवंत मल लोढ़ा 








पति ने पत्नी से कहा-
               मैं ही तुम्हारा पति हूँ 
                                और मैं ही प्रेमी,
                                               पत्नी ने कहा - अजी छोड़ो 
                यह बात है बिल्कुल व्यर्थ 
                                सारे देश की एक ही मांग है 
                                                एक व्यक्ति एक पद I

  

हाजिर-जवाब

हाजिर-जवाब 

                                     -हनवंत मल लोढ़ा 







एक न्यायालय में
              एक वकील जोर-शोर से 
                            बहस कर रहा था 
                                             इतने में बहार एक कुत्ता भौंका,
जज बोला "वन एट ए टाईम प्लीज"
              वकील शरमा गया,
                             थोड़ी ही देर बाद,
                                          जज जोर जोर से बोलने लगा 
इतने में ही बाहर एक गधा रेंका
               वकील तपाक से खड़ा हुआ और
                              बोला-
                                             "वन एट ए टाईम प्लीज"I

Thursday, November 2, 2017

कांई केणों राजस्थान रौ

कांई केणों  राजस्थान रौ 

                                                                                -हनवंत मल लोढ़ा                     

जयपुर री गुलाबी नगरी है,
चौपड़ बिछियोड़ी सगली है,
सुन्दर ही सुन्दर गगरी है,
औ "गुलाब" हिन्दुस्तान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
औ जोधाणो सूरज नगरी है,
उम्मेद भवन सूं किल्ला तक री है,
सुन्दरियां री डगरी है,
घर दुर्गादास मेजर शैतान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
मन्डोर सो बाग नहीं जग में,
सरगां सूं सुन्दर रग रग में,
मिठास भरियो है जग जग में,
करे भगवान सो मान मेहमान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
"जोधपुरी-कोट" गुण जग जावे 
साफो सगलां ने ललचावे,
चुंदड़ी सुन्दरियां मन भावे,
जूती पैरण ने जग आवे,
ओ स्थल स्वाभिमान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
झीलां रो शहर उदयपुर है,
ओ सुंदरता सूं सुन्दर है,
ओ बाग बगीचां रौ घर है,
मेवाड़ी पगड़ी धाकड़ है,
पिछोला फतेहसागर है,
ओ मेवाड़ प्रताप महान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
है नाथद्वार ने राजसमंद 
झीलां रौ राजा जयसमंद 
कुम्मलगढ़ ने विजय स्तंभ,
चित्तौड़गढ़ पदमिनी आन रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
कोटा बूंदी भी निराला है,
चम्बल रा साली साला है,
अजमेरी दरगा वाला है,
बीकानेरी मतवाला है,
अमृत जल जवाई बांध रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
जैसलमेरी जग ने भावे,
रेतां रा धोरा ना मावे,
दुनियां सारी देखण आवे,
मोरिया मीठा मीठा गावे,
स्थल राजपूती आन रौ
कांई केणों  राजस्थान रौ?
आबु पाड़ां रौ राजा है,
राणकपुर  मंदिर राजा है,
दिलवाड़ा दिल ने भाजा है,
नक्की रा बाजे बाजा है,
सत् गणों नाकोड़ा भगवान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
नर नारी अटा रा प्यारा है,
रणबंका योद्धा खारा है,
बच्चा तो घणा दुलारा है,
ओ गौरव हिन्दुस्तान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?
एे प्रभु पुर्नजन्म यदि पाऊं 
दुनिया में पाछो फिर आऊं,
यादां ने साथ यदि लाऊं,
तो गीत अढा रा ही गाऊं,
कवि बण ने फिर मैं दोहराऊं,
ओ मुल्क मीरां रे भगवान रौ,
कांई केणों  राजस्थान रौ?



















































Tuesday, May 10, 2016

गिला

गिला 
 - हनवंत मल लोढ़ा






मेरे देश को खाया नहीं 
                   मुगलों ने,
                                 फिरंगियों ने,
                                                   मगर खाया है ,

आपसी झगड़ों ,
             तेवरों ,
                       तरंगियों ने। 

एे नये साल तू मन को जीत।

ऐ नये साल तू मन को जीत 


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तू मन को जीत ,
जीव जगत के सभी सुखी हों ,
सब के मन में अनंत खुशी हो ,
सब के मन में अनंत ही प्रीत 
एे नये साल तू मन को जीत। 

प्राकृतिक विपदा ना आवे ,
कोई देव प्रकोप ना सताये ,
सुन्दर हो जीवन संगीत ,
एे नये साल तू मन को जीत। 

ना तो जग में अनावृष्टि हो ,
ना ही कहीं अतिवृष्टि हो ,
ना कोई होवे भयभीत ,
एे नये साल तू मन को जीत। 

आतंकों का नाम ना होवे ,
जात-पांत का काम ना होवे ,
रण-भेरी का ना बजे संगीत ,
एे नये साल तू मन को जीत।